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आजादी का अमृत महोत्सव

           भारत 200 वर्ष तक अंग्रेजों के अधीन था जिसके बाद हमारे देश में आजादी के लिए काफी लड़ाई लड़ी गयी और 15 अगस्त 1947 को हमारा देश ब्रिटिश शासन से मुक्त होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था।   इसीलिए १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप मे मनाया जाता है,और ये भारत का राष्ट्रीय त्यौहार माना जाता है। इस वर्ष 15 अगस्त 2022 को देश की आजादी के 76 साल पूरे हुए।भारत के आज़ाद होने की खुशी में प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत सरकार द्वारा अनेकों प्रकार के भिन्न-भिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें से एक “आजादी का अमृत महोत्सव” कहा जाता है। इसे प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा 12 मार्च, 2021 को शुरु किया गया था और 15 अगस्त 2023 तक चलेगा। किसी भी देश का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है जब वह अपने पिछले अनुभवों और विरासत के गौरव के साथ पल-पल जुड़ा रहता है। हम सभी जानते हैं कि भारत के पास एक समृद्ध ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का एक अथाह भंडार है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय चेतना को भारत के घर-घर पहुँचाने के लिए, प्रधान...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०: तकनीकी शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत।

शिक्षा शब्द संस्कृत के 'शिक्ष' धातु से लिया गया जिसका अर्थ होता है, 'सीखना या सिखाना।' जिस प्रक्रिया द्वारा अध्ययन और अध्यापन होता है, उसे शिक्षा कहते हैं। शिक्षा एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है,जो हर किसी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है यह मनुष्य को जीवन की चुनौतियों का कुशलता से सामना करने के लिए तैयार करता है।शिक्षा वह अस्त्र है, जिसकी सहायता से मनुष्य बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का सामना, सही- गलत का भेद करना सीखता हैं। शिक्षा एक गतिशील प्रकिया है, जो जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ-साथ चलती है। हमारे जीवन का अभिन्न अंग भी है, शिक्षा के बिना हम सब अधूरे हैं। हम सब को पूरा शिक्षा ही कर सकतीं हैं। शिक्षा के माध्यम से हम अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।       शिक्षा को सुचारू रूप में चलाने के लिए समय-समय पर बहुत सी कमीशन, कमेटी और नीतियां बनती रही सन १९६८ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पहली बार बनी उसके बाद १९८६ में दूसरी शिक्षा नीति आई इसका संशोधन १९९२ में हुआ और अब ३४ साल बाद नई शिक्षा नीति २९ जुलाई २०२० को आई।               परिवर्तन ही प्रकृति क...

भारतीय भाषाओं में न्यायिक प्रक्रिया

भारतीय भाषाओं में न्यायिक प्रक्रिया उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय की भाषा अंग्रेजी होने के कारण उसके निम्न न्यायालयों में भी इस भाषा का प्रभाव पड़ना अनिवार्य हैं। जिला न्यायालयों में भी अंग्रेजी का वर्चस्व बढ़ने लगा, ज्यादातर भारतीयों को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है। भारत में प्रचलित हिंदी 40 करोड़ लोगों की मातृभाषा है और दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हैं।अधिकतर लोगों को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ही नहीं है, तो उस भाषा में न्याय करना कहां तक न्यायसंगत हैं ? न्याय की देवी आंखों पर पट्टी इसलिए बाँधे रखती है क्योंकि उसे निष्पक्ष रहना है। सामाजिक न्याय पाने के लिए सुनिश्चित करना होगा कि कानून और नीतियां सभी व्यक्तियों पर समान हो। सामाजिक न्याय के लिए यह जरूरी है कि सब लोगों के साथ साथ कानूनी नीतियों और भाषाओं के साथ भी समान बर्ताव करना चाहिए। न्याय मतलब हर वाजिब व्यक्ति को उसका वाजिब हिस्सा देना होगा । हमारे देश का संविधान 2 वर्ष, 11 माह तथा 18 दिन की अवधि में निर्मित हुआ तथा 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व देश में स्वतंत्रता आंदोलन के सा...

'प्रेमचंद की उर्जा शिवरानी देवी।'

शिवरानी देवी का जन्म 1889 ई0 में हुआ था पर तारीख का पता आज तक नहीं चला। इनकी शादी 11 वर्ष की उम्र मे हुई थी। शादी के कुछ ही दिन हुए ही थे कि यह विधवा हो गई थी,इतनी कम उम्र की होने के कारण उन्हें पता ही नहीं था कि विधवा क्या होता है। इनके पिता मुंशी देवीप्रसाद अपने बेटी की दूसरी शादी करवाना चाहते थे। इन्होंने अपनी पुस्तक "कायस्थ बाल विधवा उध्दारक पुस्तिका" लिखे, जिसमें बेटी के पुनर्विवाह के संबंध में विज्ञापन छपा था।इस विज्ञापन को पढ़कर ही प्रेमचंद ने उनसे शादी का प्रस्ताव भेजा। देवीप्रसाद जी ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिये और दोनों का विवाह 1905 में हुआ। शिवरानी देवी प्रेमचंद की दूसरी पत्नी बनी। शिवरानी देवी पढ़ी-लिखी नहीं थी पर शादी के बाद प्रेमचंद ने उन्हें पढ़ाया।उन्हें साहित्य में रुचि नहीं थी पर प्रेमचंद्र को पढ़ते,लिखते देखकर उनकी भी रुचि साहित्य में होने लगी।              यह इतनी उदात्त थी कि इन्हें जब पता चला कि प्रेमचंद की पहली पत्नी जिंदा है, मरी नहीं है तो वह प्रेमचंद को कहने लगी कि उन्हें घर ले कर आइए। "आप कृपया करके उन्हें ले आइये।" प्रेम...

प्रेमचंद

 प्रेमचंद जिनका मूल नाम धनपतराय श्रीवास्तव था। यह नवाबराय नाम से उर्दू में रचना करते थे। हिंदी साहित्य में प्रेमचंद का अद्भुत योगदान है चाहे वह उपन्यास , कहानी का क्षेत्र हो या नाटक का प्रेमचंद ने सभी विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई है। प्रेमचंद्र जी का कथन, "सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं।" प्रेमचंद जी भी अपने कर्तव्य पथ पर अजीवन  अवीचल रहे, इन्होंने पंद्रह उपन्यास, तीन सौ से अधिक कहानियां लिखे जो मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। इन्होंने नाटक भी लिखे संग्राम, कर्बला, प्रेम की वेदी, दस अनुवाद, सात बाल पुस्तके आदि भी लिखे। प्रेमचंद ने  मर्यादा, माधुरी, हंस ,जागरण आदि पत्रिका का संपादन भी किया है। पहले-पहल प्रेमचंद जी नवाबराय नाम से रचना करते थे।उनकी पहली कहानी संग्रह 'सोजे वतन' नाम से निकला, जिसमें पांच कहानियां संकलित हैं। इनकी सभी कहानी में देश प्रेम, जनता के दर्द आदि का वर्णन था ,जिससे अंग्रेजी शासकों को इस कहानी संग्राह में बगावत की बू आने लगी और अंग्रेजी शासकों ने इस कहानी संग्रह को जब्त कर आग लगा दिया और कभी ना लिखने का आदेश...

मकान से घर ,घर से मलबे बनने की कथा।

      एक घर जो बहुत सालों पहले बना वह घर नहीं वह मकान था। उस मकान में एक परिवार रहने लगे ,वह परिवार काफी बड़ा तो नहीं था पर था एक परिवार। उस परिवार के रहने के कारण उस बेजान मकान में जान आई तब वह मकान मकान नहीं रहा घर में तब्दील हो गया।फिर अचानक उस घर के सभी सदस्य कहीं और रहने लगे इस घर को मकान समझ कर चलें गए।अब उस घर में कोई नहीं रहता न कोई आता है और न कोई जाता हैं, अगर उस घर को कहने की क्षमता होती तो वह जरूर उस दिन कहता उस परिवार को की "तुम लोगों को जहाँ जाना है जाओ पर मुझसे मिलने जरूर आते रहना।"          काफ़ी सालों से वह घर बंद पड़ा हुआ हैं। उस घर के जर्रे जर्रे उस परिवार को याद कर रहे हैं।वह दरवाजा जो काफी सालों से बंद है उस दरवाजा को कोई अब खटखटाता नहीं है। दरवाजा चाहता है कि उसे कोई खोलें और उस खोलने के कारण जो स्पर्श होगा उससे उसमें एक बार फिर से जान आ जाएगी। घर के अंदर टंगी हुईं घड़ी हैं उसे अब कोई देखता ही नहीं। घड़ी चाहती हैं कोई तो उसे पहले जैसा देखें और देख कर जोर से चिल्ला कर कहें " 8 बज गए हैं और अभी तक नाश्ता तैयार नहीं हैं।" या फ...

21 भागों में विभक्त तमस उपन्यास के पात्र। UGC NTA NET HINDI 2020

**● 21 भागों में विभक्त तमस उपन्यास के पात्र:- ** **नाथू चमार-* सुअर मरता है ,जाति से चमार हैं।  **मुराद अली-*** षड्यंत्रकारी व्यक्ति सूअर मारने को कहता है और ₹5 भी दिए थे नत्थू को।  **बख्शी -* कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटरी।  **रामदास-* मास्टर।  **मेहता,अजीज, देसराज,शंकर, कश्मीरीलाल, जरनैल - सभी प्रभात फेरी करते थे।*  **रिचार्ज-* अंग्रेजी शासन, डिप्टी कमिश्नर।  **लीजा-* रिचस की पत्नी  **पुण्यआत्मा वामप्रस्थीजी-* धार्मिक उन्माद, धर्मगुरु  **मंत्री जी-* दुबले-पतले किंतु जोशीले।  **दानवीर प्रधान जी - शहर के जाने-माने व्यापारी *हरबर्ट- मिशन कालेज के अमरीकी प्रिंसिपल।  **बलदेव सिंह-* डिफेंस मिनिस्टर।  **दाढ़ीवाला मौलानादाद -* बिजली कंपनी का क्लक, मुस्लिम लीग का कारकुन।  **हकीम अब्दुलगनी-* कांग्रेसी मुसलमान।  **खानसामा-* लीजा और रिचर्ड का नौकर।  **रोशनलाल-* रिचर्ड के दफ्तर का बाबू जिसे लीजा ने अपने तजुर्बे के लिए बहुत सारे सवाल पूछी कि वह हिंदू है या मुसलमान या सिक्ख।  **लाला लक्ष्मी...