आजादी का अमृत महोत्सव
भारत 200 वर्ष तक अंग्रेजों के अधीन था जिसके बाद हमारे देश में आजादी के लिए काफी लड़ाई लड़ी गयी और 15 अगस्त 1947 को हमारा देश ब्रिटिश शासन से मुक्त होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था।
इसीलिए १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप मे मनाया जाता है,और ये भारत का राष्ट्रीय त्यौहार माना जाता है। इस वर्ष 15 अगस्त 2022 को देश की आजादी के 76 साल पूरे हुए।भारत के आज़ाद होने की खुशी में प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत सरकार द्वारा अनेकों प्रकार के भिन्न-भिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें से एक “आजादी का अमृत महोत्सव” कहा जाता है। इसे प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा 12 मार्च, 2021 को शुरु किया गया था और 15 अगस्त 2023 तक चलेगा। किसी भी देश का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है जब वह अपने पिछले अनुभवों और विरासत के गौरव के साथ पल-पल जुड़ा रहता है। हम सभी जानते हैं कि भारत के पास एक समृद्ध ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का एक अथाह भंडार है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय चेतना को भारत के घर-घर पहुँचाने के लिए, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अहमदाबाद, गुजरात में साबरमती आश्रम से एक पदयात्रा (स्वतंत्रता मार्च) को हरी झंडी दिखाकर स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के लिए समर्पित ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया।12 मार्च का ही दिन इसलिए है,क्योंकि इसी दिन सन् 1930 में दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। यह दांडी मार्च 6 अप्रैल, 1930 तक चला था।यह महोत्सव उन महान लोगों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने 75 साल पहले देश को आज़ाद कराने में न केवल आजादी के लिए लड़ाई लड़ी बल्कि इसके लिए अपने बहुमूल्य जीवन का बलिदान भी दिया।आजादी के अमृत महोत्सव का मतलब होता है:- स्वतंत्रता सेनानियों से प्राप्त प्रेरणा का अमृत। स्वतंत्रता का अमृत यानि नए विचारों का अमृत, स्वतंत्रता का अमृत है,नए संकल्पों का अमृत,एक ऐसा पर्व जिसमें भारत आत्मनिर्भर होने का संकल्प लेता है।आज़ादी की ऊर्जा का अमृत, आज़ादी का अमृत महोत्सव यानी – स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणाओं का अमृत। आज़ादी का अमृत महोत्सव यानी – नए विचारों का अमृत। नए संकल्पों का अमृत। आज़ादी का अमृत महोत्सव यानी – आत्मनिर्भरता का अमृत। और इसीलिए, ये महोत्सव राष्ट्र के जागरण का महोत्सव है। ये महोत्सव, सुराज्य के सपने को पूरा करने का महोत्सव है। ये महोत्सव, वैश्विक शांति का, विकास का महोत्सव है।
इस अमृत महोत्सव के 5 मुख्य स्तंभ हैं:
स्वतंत्रता संग्राम
75 वर्षों में उपलब्धियाँ
योजनाएं
संकल्प
कार्य
इस राष्ट्रीय महोत्सव के दौरान सभी सरकारी भवन और घरों पर तिरंगा फहराया जाएगा और कुछ जगहों पर रैलियां भी निकाली जाएगी ताकि इसका महत्व लोगों तक पहुंचया जा सके। स्कूल के बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपनी कला के माध्यम से आजादी का महोत्सव मानाएंगे। बच्चों को आजादी के संघर्ष की कहानियां बताई जा रही है। यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है, जिन्होंने न केवल भारत को उसकी विकास यात्रा में आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बल्कि उनके भीतर प्रधानमंत्री मोदी के भारत 2.0 को सक्रिय करने के दृष्टिकोण को संभव बनाने की शक्ति और क्षमता भी है, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना से प्रेरित है।
वर्तमान समय में जो युवा पीढ़ी है जिनकी उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच में है वह आजादी के संघर्ष और लोकतंत्र के महत्व को बेहतर ढंग से नहीं जानती हैं। कई विचारधारों में बंटी यह पीढ़ी गुमराही के एक चौराहे पर खड़ी है। ऐसे में उसे अपने देश के इतिहास और वर्तमान से जोड़ना जरूरी है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम स्वतंत्र भारत के इस ऐतिहासिक काल को देख रहे हैं,जिसमें भारत प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज के स्वतंत्र भारत का नाम दुनिया में अग्रिम पंक्ति में लिखा जाता है,कहते हैं कि जो देश अपना इतिहास भुल जाता है उसका भूगोल भी बदल जाता है और यह हुआ भी है। कई कुर्बानियां व्यर्थ चली गई तब जबकि देश का विभाजन हुआ।सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ भारत सरकार लगातार अपनी योजनाओं के माध्यम से लोगों तक सेवाएं पहुंचाती रहती है। इससे वर्तमान भारत की तस्वीर बदल गई है। आज भारत को दुनिया सम्मान और आशाभरी नजरों से देख रही है। इन सभी बातों पर ध्यान देंगे तो हम सबको गर्व महसूस होगा कि हम भारतवासी हैं और हम भारत जैसे देश में पैदा हुए हैं, इसलिए आजादी का अमृत महोत्सव मनाना बहुत जरूरी है।आजादी का महोत्सव किसी विशेष जाति, धर्म अथवा राज्य का नहीं बल्कि संपूर्ण भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
Comments
Post a Comment