राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०: तकनीकी शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत।
शिक्षा शब्द संस्कृत के 'शिक्ष' धातु से लिया गया जिसका अर्थ होता है,'सीखना या सिखाना।' जिस प्रक्रिया द्वारा अध्ययन और अध्यापन होता है, उसे शिक्षा कहते हैं। शिक्षा एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है,जो हर किसी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है यह मनुष्य को जीवन की चुनौतियों का कुशलता से सामना करने के लिए तैयार करता है।शिक्षा वह अस्त्र है, जिसकी सहायता से मनुष्य बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का सामना, सही- गलत का भेद करना सीखता हैं। शिक्षा एक गतिशील प्रकिया है, जो जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ-साथ चलती है। हमारे जीवन का अभिन्न अंग भी है, शिक्षा के बिना हम सब अधूरे हैं। हम सब को पूरा शिक्षा ही कर सकतीं हैं। शिक्षा के माध्यम से हम अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
शिक्षा को सुचारू रूप में चलाने के लिए समय-समय पर बहुत सी कमीशन, कमेटी और नीतियां बनती रही सन १९६८ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पहली बार बनी उसके बाद १९८६ में दूसरी शिक्षा नीति आई इसका संशोधन १९९२ में हुआ और अब ३४ साल बाद नई शिक्षा नीति २९ जुलाई २०२० को आई।
परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है, जब हमारे जीवन में अनेक परिवर्तन हो रहे है, तो हमारी शिक्षा में भी परिवर्तन होना अनिवार्य है, इसलिए यह परिवर्तन को देखकर हम कह सकते हैं कि जो नई शिक्षा नीति २०२० आई वह इसी परिवर्तन को ध्यान में रखकर लाई गई है। इस परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए इस नीति के कारण शिक्षा में बहुत उन्नति होगी और सबसे खास बात यह है कि छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इससे बहुत फायदे है। मैं यहां दो बातें बताना चाहतै हूं, एक तो छात्रों की उन्नति और दूसरा देश की उन्नति। यूँ तो जाहिर सी बात है कि जब देश के युवा उन्नति करेंगे तो देश खुद-ब-खुद उन्नति की ओर अग्रसर होगा। इस नीति में व्यवसायिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि शिक्षा, मातृभाषा में शिक्षा आदि विषयों की बात की गई है, और अनेक बदलाव किए गए हैं स्कूली शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च माध्यमिक शिक्षा, शोध-अनुसंधान आदि विषयों में। अभी का पैटर्न १०+२ फॉलो किया जाता है इस नीति में यह भी बदलकर ५+३+३+४ का पैटर्न किया जाएगा। इस बदलाव के तहत स्कूली शिक्षा में १००%जी आई आर प्राप्त कर सकेंगे और २०३५ तक ५०% माध्यमिक स्तर पर। स्कूली शिक्षा व्यवस्था को चार स्ट्रक्चर में बांटा गया है:- पहला फाउंडेशन, दूसरा प्रोपराइटरी, तीसरा मिडल, चौथा सेकेंडरी।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन की ओर गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्व भर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेगी,दूसरी ओर डेटा साइंस,कंप्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्र में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और मांग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज विज्ञान विविध विषयों में योग्यता रखते हो। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से भी हमें ऊर्जा,भोजन, पानी स्वच्छता आदि की आवश्यकता को पूरा करने के नए रास्ते खोजने होंगे इस कारण भी रसायन, भौतिक,जीव, जलवायु विज्ञान, कृषि और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में नहीं कुशल कामगारों की जरूरत होगी।
इस राष्ट्रीय शिक्षा का विजन भारतीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली है जो सभी को उच्चतर, गुणवत्ता शिक्षा उपलब्ध कराके और भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाकर भारत को ही जीवंत और न्यायसंगत ज्ञान समाज के बदलने के लिए प्रत्यक्ष रूप में योगदान करेगी। नीति का विजन छात्रों में भारतीय होने का गर्व ना केवल विचार में,बल्कि व्यवहार,बुद्धि और कार्यों में भी और साथ ही ज्ञान,कौशल, मूल्यों और सोच में भी होना चाहिए। जो मानवाधिकारों, स्थाई विकास और जीवनयापन तथा वैव्क्षिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हो ताकि वे सही मायने में वैश्विक नागरिक बन सकें।
इस नीति में तकनीकी शिक्षा पर भी विशेष बल दिया गया है, तकनीकी शिक्षा से हम लोग आत्मनिर्भर बन सकते हैं। तकनीकी शिक्षा एक विशिष्ट प्रकार का शिक्षा है, जिनका व्यक्ति और समाज के साथ अभिन्न संबंध है।किसी व्यवसाय के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं अभिवृत्तियों की शिक्षा देना तकनीकी शिक्षा है। यह शिक्षा सामान्य पारंपरिक शिक्षा से अलग है।यह छात्रों को चिकित्सा, ड्राइविंग, इंजीनियरिंग, कृषि आदि क्षेत्रों में कुशल बनाती है। यह देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज भारत विकास की ओर बढ़ रहा है, कई सुविधाएं मिल चुकी है अब हमारे देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, क्योंकि जिस देश में तकनीकी शिक्षा को महत्व दिया जाता है वह देश का विकास होता है। हमारे देश में बड़ी मात्रा में ऐसे युवा व्यक्ति की आवश्यकता है,जो देश के विकास में साथ दें और आत्मनिर्भर बने। देश के युवा आगे बढ़ेंगे तब देश आगे बढ़ेगा हमे सभी व्यवसाय में योगदान और प्रशिक्षित कार्य करने वालों की आवश्यकता है। यह तभी संभव होगा जब व्यवसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण दे। इस विषय को सरकार ने गंभीरता से लिया है कि हमारे देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। शिक्षा नीति में तकनीकी शिक्षा के लिए बहुत कुछ सोचा गया जिसे युवाओं आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
'मल्टीपल एंट्री और एग्जिट'की शिक्षा नीति में चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या ६ सेमेस्टर पढ़ने में बीच में कुछ कारणवश नहीं पढ़ पाने से पूरा साल या सेमेस्टर खराब हो जाता है। अगर बाद में पढ़ना हुआ तो दोबारा शुरू से शुरू करना होता है, पर यह मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के कारण १ साल के बाद सर्टिफिकेट,२ साल के बाद डिप्लोमा,३ और ४ साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। यह छात्रों के लिए सुनहरा फैसला है।
पाठ्यक्रम में लचीलापन को लागू करके विद्यार्थियों को अधिक संख्या में विकल्प प्रदान करना सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। इसमें विद्यार्थियों चुने विकल्पों में से किसी में प्रमुख तो किसी में मामूली विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर कंप्यूटर इंजीनियरिंग में प्रमुख विशेषज्ञता के साथ इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में मामूली विशेषता हो सकती है।
नए कार्यक्रम शुरू किए जा सकते इन क्षेत्रों में- कला और मानविकी,साइबर सुरक्षा, स्मार्ट सिटी, मेक्टोनिक्स, डाटा विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्रो में।
तकनीकी शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान सुनिश्चित करने के लिए उद्योग और उच्चतर शिक्षा संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग की भी अधिक आवश्यकता होगी। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा और अन्य विषयों के बीच अंतर समाप्त होने की संभावना बढ़ती जा रही है। तकनीकी शिक्षा भी बहु विषयक शिक्षण संस्थाओं और कार्यक्रम के भीतर पेश की जाएगी और अन्य विषयों के साथ गहराई से जुड़ने का मौका मिलेगा।
अत्याधुनिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे- जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, जोनोमिक अध्ययन, न्यूरोसाइंस के साथ साथ तेजी से प्रमुखता हासिल कर रहे है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,थ्रीडी मशीनिंग, मशीन लर्निंग और बड़े डेटा विश्लेषण क्षेत्र में पेशावरो को तैयार करने के अग्रणी भूमिका निभाएगी।
तकनीकी विश्वविद्यालय, विधि विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य विज्ञानक विश्वविद्यालय, स्टैंडअलोन कृषि विश्वविद्यालय और अन्य विषयों के स्टैंडअलोन विश्वविद्यालय का उद्देश्य अपने आप में एक विशेष संस्था के रूप में विकसित होना चाहिए। जो एक समग्र और बहू विषयक शिक्षा मुहैया करवाए।
टेक्निकल एजुकेशन में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही 'तकनीकी शिक्षा पर विषयक शिक्षा शोध नवोन्मेष'(TEQIP) नाम से एक नई योजना शुरू करेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०, २१ वीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है। जिसका लक्ष्य हमारे देश के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि शिक्षा से न केवल साक्षरता और संख्याज्ञान जैसी बुनियादी क्षमताओं के साथ साथ उच्चतर स्तर की तार्किक और समस्या समाधान संबंधी संज्ञानात्मक क्षमताओं का विकास होना चाहिए, बल्कि नैतिक,सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी व्यक्ति का विकास होना आवश्यक है, तभी आज के युवा पीढ़ी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। खुद अपने बल पर कर के जो आत्मनिर्भरता आती है वो दूसरों के बल से करवा कर कहा आ पाती हैं।
शिक्षा नीति में बदलाव समयानुसार आवश्यक है, बदलती हुई व्यवस्था और मांग के अनुसार मानव संसाधन को इसके माध्यम से ही विकसित एवं प्रशिक्षित किया जा सकता है
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