मकान से घर ,घर से मलबे बनने की कथा।
एक घर जो बहुत सालों पहले बना वह घर नहीं वह मकान था। उस मकान में एक परिवार रहने लगे ,वह परिवार काफी बड़ा तो नहीं था पर था एक परिवार। उस परिवार के रहने के कारण उस बेजान मकान में जान आई तब वह मकान मकान नहीं रहा घर में तब्दील हो गया।फिर अचानक उस घर के सभी सदस्य कहीं और रहने लगे इस घर को मकान समझ कर चलें गए।अब उस घर में कोई नहीं रहता न कोई आता है और न कोई जाता हैं, अगर उस घर को कहने की क्षमता होती तो वह जरूर उस दिन कहता उस परिवार को की "तुम लोगों को जहाँ जाना है जाओ पर मुझसे मिलने जरूर आते रहना।" काफ़ी सालों से वह घर बंद पड़ा हुआ हैं। उस घर के जर्रे जर्रे उस परिवार को याद कर रहे हैं।वह दरवाजा जो काफी सालों से बंद है उस दरवाजा को कोई अब खटखटाता नहीं है। दरवाजा चाहता है कि उसे कोई खोलें और उस खोलने के कारण जो स्पर्श होगा उससे उसमें एक बार फिर से जान आ जाएगी। घर के अंदर टंगी हुईं घड़ी हैं उसे अब कोई देखता ही नहीं। घड़ी चाहती हैं कोई तो उसे पहले जैसा देखें और देख कर जोर से चिल्ला कर कहें " 8 बज गए हैं और अभी तक नाश्ता तैयार नहीं हैं।" या फ...