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मृदुला गर्ग द्वारा रचित उपन्यास “उसके हिस्से की धूप "की भाषा

भाषा का एक जरिया है जो एक व्यक्ति के भावनाओं को किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाती है। भाषा के माध्यम से लोग आपस में जुड़े रहते हैं। उपन्यास में, कहानी  में, नाटक में आदि अनेक विधाओं में इस भाषा के माध्यम से रचनाकार पाठकों को यह बता सकते हैं जो वह महसूस करते  है ।आठवें दशक की जानी-मानी लेखिका ‘मृदुला गर्ग’ के उपन्यास भाषिक वैशिष्ट्य  के कारण अपनी अलग पहचान लिए हुए है । उनके प्रमुख सभी उपन्यास में भाषा के नए-नए रूप,  प्रतीक, बिम्ब ,अलंकार आदि का प्रयोग हुआ है। फलस्वरूप उनकी  औपन्यासिक  भाषा में कसावट ,तराश सूक्ष्मता  और सम्प्रेणीयता  के दर्शन होते हैं। भाषा और शैली के प्रति सजगता के कारण उनके उपन्यास में शिल्पगत चमत्कार भी अनुभव होता हैं।  ‘मृदुला गर्ग’ द्वारा रचित उपन्यास “उसके हिस्से की धूप” की सराहना उनके भाषा पक्ष  को लेकर काफी हुई है। इस  उपन्यास में हिंदी के अलावा अंग्रेजी भाषा का भी प्रयोग हुआ- ' ट्रक कॉल फ्रॉम बेंगलुरु',' स्पीक प्लीज','सूट',' टाई',' फैक्ट्री',' फ्लाइट',' रिसेप्शन',' लेक्चर','कमेंट्री',...